महामंत्र छे मोटो जगमां, एक ज श्री नवकार रे धून

 लगावो साथे मळी सहुं ए छे तारणहार रे हे जी

महामंत्र छे मोटो जगमां…

नमो अरिहंताणं कहेता तरीये सागर पार रे (२)

नमस्कार होजो सिध्धो ने, कोटि कोटि वार रे (२)

आचार्य भगवंतो ने हुं, वंदु वारंवार रे धून लगावो…

उपाध्याय स्वाध्याय दइने, करे सदा उपकार रे (२)

साधुनी सेवा करवाने, थाजो सौ तैयार रे (२)

ए पांचेनी भक्ति करीने सफळ करो अवतार रे धून लगावो…

नवकारना अनेक गुणो, गणता नावे पार रे (२)

एमां पूर्ण पणे समायो चौद पूर्वनो सार रे (२)

धन्य धन्य अवतार जेनो, समरे श्री नवकार रे धून लगावो…

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